Monday, November 8, 2010

छात्रों को एक करोड़ रुपए की छात्रवृति वितरित

छात्रा को वजीफा देते मुख्यमंत्री हुड्डा (फाइल फोटो) ।
सिरसा। 08 नवम्बर(सुनीत सरदाना) जिला में गत एक वर्ष के दौरान अनुसूचित जाति एवं पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति योजना के तहत 1166 विद्यार्थियों को एक करोड़ रुपए की धनराशि छात्रवृति के रुप में प्रदान की गई है।की
    यह जानकारी देते हुए विभागीय प्रवक्ता ने बताया कि इनमें से 510 अनुसूचित जाति के छात्रों को 85 लाख रुपए तथा पिछड़े वर्ग के 656 विद्यार्थियों को 15 लाख रुपए की राशि दी जा चुकी है।  उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत ऐसे छात्रों को छात्रवृति प्रदान की जाती है जो सरकारी सहायता प्राप्त/निजी क्षेत्र में स्थापित तकनीकी संस्थानों में पढ़ रहे हो और जिनके माता-पिता की आय एक लाख रुपए तक हो, को 140 रुपए से 740 रुपए तक प्रतिमास छात्रवृति दी जाती है।
    उन्होंने ने बताया कि छात्रों को ट्यूशन फीस तथा अन्य जरुरी नॉन रिफंडेबल फीसों में भी छूट दी जाती है। पत्राचार पाठ्यक्रम से पढऩे वाले छात्रों को 750 रुपए वार्षिक भत्ता पुस्तकों के लिए भी दिया जाता है तथा इसके साथ-साथ कोर्स फीस की प्रतिपूर्ति की जाती है। पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति के अंतर्गत ऐसे छात्र जिनके माता-पिता की वार्षिक 44 हजार 500 रुपए से अधिक न हो को 50 रुपए से 200 रुपए तक की छात्रवृति प्रतिमास दी जाती है। ट्यूशन फीस तथा विश्वविद्यालय की परीक्षा फीस की अदायगी भी की जाती है। छात्रवृति के लिए आवेदन पत्र प्रत्येक 15 जनवरी तक लिए जाते है। इसलिए इस योजना के तहत लाभ प्राप्त करने वाले छात्र व शिक्षण संस्थाएं आगामी 15 जनवरी तक जिला कल्याण अधिकारी के कार्यालय में आवेदन दे सकते है।
प्रवक्ता ने यह भी बताया कि जिला में संचालित स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए पात्र समूहों के संचालक या सदस्य संपूर्ण विवरण सहित अपने प्रार्थना पत्र लघु सचिवालय प्रशासकीय खंड स्थित अतिरिक्त उपायुक्त के कार्यालय में नवम्बर माह के दौरान जमा करवा सकते है।
    इस संबंध में जानकारी देते हुए सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि जो स्वयं सहायता समूह जिला में अपनी गतिविधियां विभिन्न बैंकों के माध्यम से चला रहे है तथा जिन्होंने स्वर्ण जयंती स्वरोजगार  योजना के अंतर्गत प्रथम ग्रेडेशन, द्वितीय ग्रेडेशन या रिवालविंग फंड, ऋण एवं सब्सिडी आदि का लाभ प्राप्त नहीं किया वे समूह वित्तीय सहायता के लिए आवेदन कर सकते है।

सैनिक स्कूल में आवेदन 10 दिसम्बर तक

सिरसा। 8 नवम्बर(सुनीत सरदाना)सैनिक स्कूल रेवाड़ी में प्रवेश हेतु आगामी 10 दिसम्बर तक आवेदन किया जा सकता है। यह जानकारी देते हुए विभागीय प्रवक्ता ने बताया कि प्रवेश परीक्षा का आयोजन 2 जनवरी 2011 को किया जाएगा। आवेदन हेतु आवेदन पत्र आगामी 9 दिसम्बर 2010 तक सैनिक स्कूल  सैक्टर-4 रेवाड़ी से प्राप्त किए जा सकते है। उन्होंने यह भी बताया कि विवरण पत्रिका सामान्य तथा रक्षाकर्मी के लिए 450 रुपए तथा अनुसूचित जाति व जनजाति के उम्मीदवार हेतु 300 रुपए का बैंक ड्राफ्ट भेजकर डाक द्वारा भी प्राप्त किए जा सकते है। सैनिक स्कूल में प्रवेश छठी कक्षा में केवल उन्हीं पुरुष छात्रों को ही दिया जाएगा जिनकी जन्मतिथि 2 जुलाई 2000 तथा 1 जुलाई 2001 के बीच की हो। छात्रों से प्रवेश के समय लगभग 75 हजार 190 रुपए जिनमें 3000 रुपए सामान्य एवं रक्षा श्रेणी तथा 1500 रुपए अनुसूचित जाति एवं जनजाति की सुरक्षा राशि है। यह राशि छात्रों को विद्यालय छोडऩे पर वापिस कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय तथा प्रांतीय सरकारों द्वारा छात्रों की शैक्षिक स्थिति तथा माता-पिता की वार्षिक आय के आधार पर उदारता पूर्वक छात्रवृतियां प्रदान भी की जाएगी।
प्रवक्ता ने बताया कि प्रवेश के लिए कुल सीटों का 15 प्रतिशत, 7.5 प्रतिशत तथा 25 प्रतिशत क्रमश: अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा रक्षाकर्मियों के बच्चों के लिए आरक्षित है। इस विद्यालय में छात्रों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खडग़वासला पुणे में प्रवेश हेतु शैक्षिक, शारीरिक तथा मानसिक रुप से तैयार करना स्कूल का उद्देश्य है। इसके साथ-साथ स्कूल में शारीरिक, मानसिक एवं चारित्रिक विशिष्टाएं भी उत्पन्न करके आदर्श नागरिक बनाना है। विद्यालय में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा प्रदान करके अनुशासन चरित्र निर्माण तथा देशभक्ति पर भी जोर दिया जाता है।  

Sunday, November 7, 2010

विश्वकर्मा के पदचिन्हों पर अग्रसर हो हमारा समाज:तंवर

सांसद तंवर को स्मृति चिन्ह देते कमेटी के सदस्य ।
जनसभा को संबोधित करते सांसद ।
फतेहाबाद। 7 नवम्बर(सुनीत सरदाना): सिरसा से सांसद डा. अशोक तंवर ने कहा कि समाज को भगवान विश्वकर्मा के दिखाए रास्ते पर चलना चाहिए और उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। भगवान विश्वकर्मा ने इस सृष्टि की रचना की और वाहन क्रांति की एक ऐसी बुनियाद सैंकड़ों वर्ष पहले रख दी थी, जिसके बारे में उस समय लोगों ने सोचा भी नही होगा। यह कहना है सांसद अशोक तंवर का,वे यहाँ विश्वकर्मा दिवस पर बीघड़ रोड़ स्थित श्री विश्वकर्मा मन्दिर में आयोजित समारोह में उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए कहे। उनके साथ कार्यक्रम में पूर्व संसदीय सचिव दुड़ा राम भी थे। डा. तंवर ने श्री विश्वकर्मा मन्दिर व धर्मशाला के निर्माण के लिए 5 लाख रूपए देने की घोषणा की।  उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा ने हमें एक ऐसा रास्ता दिखाया है, जिससे काम करने की भावना विकसित  होने के साथ-साथ समाज के हर वर्ग को मिल-जुल कर काम करने की प्रेरणा दी और व्यक्ति को अपने निजी स्वार्थो को छोड़ करके समाज व राष्ट्र के नव निर्माण के लिए कार्य करना चाहिए। उन्होंने सभी लोगों को विश्वकर्मा दिवस की बधाई दी और समाज में फैल रही बुराईयों से लडऩे का आह्वान किया। डा. तंवर ने कहा कि 
वहीँ सांसद तंवर ने भूना के श्री विश्वकर्मा मन्दिर में भी आयोजित कार्यक्रम में शिरक्त की और भवन निर्माण के लिए भी 5 लाख रूपए की सहायता राशि देने की घोषणा की। इस अवसर पर उनके साथ टेक चन्द मिढ़ा, डा. मुखत्यार सिंह सदर, भवानी सिंह, वजीर जाखड़, शम्मी रति, सुरेन्द्र मिढ़ा, विरेन्द्र नांरग, रघुनाथ जांगड़ा, डा. केदार सिंह, सत्य विद्यार्थी, विनोद डेलू, सुरेन्द्र दलाल, रमेश गिल्होत्रा आदि उपस्थित थे।

Wednesday, November 3, 2010

सर्वशिक्षा अभियान पर उठे सवाल

सिरसा। 3 नवम्बर(सुनीत सरदाना) झुग्गी झोंपड़ी में रहने वाले व समाज से कटे हुए बच्चों के लिए सर्व शिक्षा अभियान क्या कर रहा है? क्या कंप्यूटर शिक्षा के लिए भी कोई अभियान चलाया जा रहा है? सर्व शिक्षा अभियान के प्रचार प्रसार हेतु गांवों में किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है? इस प्रकार के अनेक सवाल श्रोताओं ने जिला परियोजना अधिकारी डा0 मधुबाला मित्तल से चौ0 देवीलाल विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो स्टेशन 90.4 एफ एम पर कार्यक्रम हैलो सिरसा के दौरान पूछे। उन्होंने कार्यक्रम में अपराजिता के साथ श्रोताओं की जिज्ञासाओं को शांत किया।
उन्होंने बताया कि सरकार इस अभियान के अन्तर्गत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा देने पर जोर देती है तथा शिक्षा के स्तर को बढ़ाने का प्रयास भी किया जाता है। इस दौरान उन्होंने हाल ही में चलाए जा रहे राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान का भी जिक्र किया। इसमें 9वीं तथा 10वीं कक्षा को भी शामिल किया है। इसके बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि यह अभियान 2003-04 से शुरु किया गया। इससे पहले डीपीईपी की योजना सरकार द्वारा चलाई गई थी, जिसमें मात्र पहली से 5वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों का शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि बच्चों कों पढ़ाने के लिए उन्हें एकत्र करने हेतु सर्वे का सहारा लिया जाता है। इसी आधार पर विद्यालय में बच्चों का नामांकन किया जाता है।
 डा0 मितल ने शिक्षा का अधिकार के बारे में बताया कि प्रारभिंक शिक्षा से पिछड़े बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार कक्षा में दाखिला मिलता है। यदि कोई बच्चा 10 वर्ष का है और अभी तक किसी प्रकार से शिक्षा से वंचित रहा है तो उसे पहली की बजाए चौथी कक्षा में दाखिला मिल जाता है। सर्वशिक्षा अभियान में मिलने वाली सुविधाओं के बारे पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इसमें आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मुफ्त किताबें मिलती हैं। 2 किलोमीटर से अधिक दूरी से आने वाली लड़कियों को साईकिलें प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि भट्टा मजदूरों व झुग्गी झोंपड़ियों में शिक्षा से वंचित रहने वाले बच्चों के लिए अल्ट्रनेटिव एज्यूकेशन सैंटर चलाए जाते हैं,जिनमें कम समय में शिक्षा दी जाती है। इसके बाद इन बच्चों को मुख्य धारा में शामिल कर लिया जाता है। कंप्यूटर शिक्षा के बारे में परियोजना अधिकारी ने कहा कि अभियान के द्वारा 50-50 विद्यालयों का चयन करके उन्हें कंप्यूटर उपकरण उपलब्ध करवाए जाते हैं।
डा0 मित्तल ने बताया कि अनूसुचित जाति तथा अल्पसंख्यकों के बच्चों के लिए शैक्षणिक भ्रमणों का आयोजन किया जाता है। विभिन्न प्रकार की प्रश्नोतरी प्रतियोगिताओं के द्वारा भी उन्हें शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। कार्यक्रम के अन्त में उन्होंने बताया कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन एवं विभाग द्वारा दी जा रही सभी सुविधाओं की देखरेख का कार्य हमारे द्वारा ब्लॉक तथा जिला स्तर पर किया जाता है। ताकि योजनाओं का पूरा लाभ विद्यार्थियों को मिल सके। यही नहीं उन्होंने श्रोताओं से अपील की कि  बच्चों को ज्यादा से ज्यादा शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करें क्योंकि शिक्षा पर ही देश का भविष्य निर्भर है।

Tuesday, November 2, 2010

हरियाणा के खिलाड़ियों ने चमकाया भारत देश का नाम:तंवर

सांसद डॉ.अशोक तंवर (फाइल फोटो)।

सिरसा। 2 नवम्बर(सुनीत सरदाना)सिरसा लोकसभा से सांसद डा. अशोक तंवर ने हरियाणा दिवस के अवसर पर मोती लाल नेहरू खेलकूद स्कूल,राई(सोनीपत) में आयोजित खिलाडिय़ो के सम्मान समारोह "चक दे हरियाणा-चक दे इंडिया रैली" में सिरसा क्षेत्र  से पहुंचे हजारों लोगो का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह रैली ऐतिहासिक सम्मान समारोह थी जिसमें प्रदेश भर में से लाखो लोगों ने भाग लेकर खिलाडिय़ो का हौसला बढ़ाया।
    उन्होंने कहा कि प्रदेश के खिलाडिय़ो ने नई दिल्ली में आयोजित 19वें राष्ट्रमंडल खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर 37 पदक जीतकर विश्व के नक्शे पर हरियाणा का नाम अंकित किया है। राज्य के लोगो के लिए गौरव की बात है,और खेल के मामले में प्रदेश नम्बर 1 पर है। प्रदेश सरकार ने खेलो के प्रोत्साहन के लिए नई खेल नीति अपनाई जिससे खिलाडिय़ो ने अनेक पदक जीतकर प्रदेश व देश का नाम रोशन करने का काम किया है।डॉ.तंवर ने सम्मान समारोह में हजारों की संख्या में सिरसा लोकसभा क्षेत्र से राई पहुंचे हलकावासियों का धन्यवाद किया। उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का सिरसा जिला में पुरूष हॉकी अकादमी खोलने की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र के युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं मिलेगी और वे राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम बनेगे।

अवैध वाहन बने मौत के दूत

अवैध वाहनों की छत पर बैठ कर गंतव्य की और जाते यात्री ।
सिरसा। 6 नवम्बर(सुनीत सरदाना) : जिला में ग्रामीण संपर्क मार्गों से लेकर नैशनल हाईवे पर अवैध वाहन सरपट दौड़ते देखे जा सकते हैं। हादसों का पर्याय बन चुके इन अवैध वाहनों पर विभाग पूरी तरह शिकंजा कसने में नाकाम साबित हुआ है। चाहे मुख्य मार्ग डबवाली-सिरसा मार्ग का जिक्र करें या फिर ऐलनाबाद-सिरसा हो सिरसा-रानियाँ हो या सिरसा-हिसार रोड की बात करें सभी मार्गों पर ये अवैध वाहन सवारियां ढोते नजर आते हैं। इंटीरियर में पडऩे वाले पैंतालिसा एवं अन्य ग्रामीण इलाकों में भी अवैध वाहन दौड़ते नजर आते हैं।  परिवहन महकमे को ये अवैध वाहन चूना लगा रहे हैं और साथ ही दुर्घटनाओं का भी एक बड़ा कारण अवैध वाहन ही हैं। बात कुछ समय पहले की है कि एक हादसे में 15 से भी ज्यादा लोग घायल हो गए थे,और एक मैक्सी कैब पेड़ से जा टकराई थी। इस मैक्सी कैब में डेढ़ दर्जन लोग सवार थे, जिसमें से तीन लोगों को मौत ने लील लिया था। सालभर में इस तरह की अनेक घटनाएं घटित होती हैं। दरअसल पंजाब एवं राजस्थान की सीमा से सटे सिरसा जिला में अवैध वाहनों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। रोडवेज की अधिकांश बसें स्टेट एवं नैशनल हाईवे पर दौड़ती हैं। सहकारी समिति की बसों के परमिट भी अब गांवों की बजाय कस्बों व शहरों की ओर हो गए हैं। ऐसे में इंटीरियर इलाके में बस सेवा की बेहद कमी है। ऐसे में इस कमी का लाभ अवैध वाहन संचालक उठा रहे हैं। मसलन पैंतालिका इलाके में सहकारी एवं रोडवेज दोनों तरह की बस सेवा लचर है। रोडवेज प्रशासन की इसी लचरता का ही परिणाम है कि इस इलाके में दर्जनों अवैध वाहन दौड़ रहे हैं। डबवाली बड़ा उपमंडल है। सिरसा मुख्यालय से डबवाली की दूरी 60 किलोमीटर है। शाम के समय डबवाली के लिए पर्याप्त बस सेवा नहीं है। ओढां भी इसी मार्ग पर है। डबवाली जाने वाले लोगों की तादाद सैंकड़ों में है।ऐलनाबाद,रानियाँ और कालांवाली भी सिरसा के महत्वपूर्ण ब्लाक हैं। सहकारी व सरकारी बस सेवा लचर है ऐसे में अवैध वाहन ही रात्रि के समय जाने वाले यात्रियों को सुविधा देते हैं।जैसा कि विदित है कि रोडवेज़ कि बसें शाम के 7 -8 बजे तक ही हैं।बसें हाथ से निकल जाने के कारण यात्री भी लाचारी में अवैध वाहनों में सफर करने को विवश हैं। अवैध वाहन चलाने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि वो पिछले करीब 8 वर्ष से  रोजाना सिरसा से कागदना का सफर करता है। चालक ने बताया कि बहुत से लोगों के लिए तो यह एक बड़ा कारोबार है। कुछेक लोगों के तो आधा दर्जन से अधिक अवैध वाहन चलते हैं। जाहिर है कि परिवहन विभाग के ढुलमुल रवैये के चलते अवैध वाहन का धंधा बहुत से लोगों के लिए मुनाफे का गोरखधंधा और आमजन के लिए खतरा बना हुआ है। अवैध वाहनों पर शिकंजा कसने की रणनीति बाबत जब संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने कि कोशिश कि गयी तो उनसे संपर्क न हो सका।
भेड़-बकरियां या सवारियां
अवैध वाहनों में अधिकांश जीपें, बसें, टाटा सूमो व अन्य ऐसे ही वाहन शामिल हैं, जिनमें दस से अधिक लोग सवार हो सकते हैं। रोचक बात यह है कि इन जीपों में यात्रियों को भेड़-बकरियों की तरह ठूंसा जाता है और अपने ठिकानों तक पहुँचने की लालसा में यात्रियों को ऐसे वाहनों में सवार होने को बाध्य करती हैं। आम तौर पर दोपहर बाद सक्रिय होने वाले ये अवैध वाहन देर रात कतक अपना काम जारी रखते हेँ। इसकी एक वजह है कि दड़बा क्षेत्र के अनेक ऐसे गांव है जिनमें शाम क समय केवल एक ही बस जाती है और इस बस के निकलने के बाद अवैध वाहनों की चांदी शुरू हो जाती है। जिन रूटों पर प्राइवेट बसें चलती हैं उन पर सरकारी बसें नहीं चलती और हैरानी की बात यह है कि करीब 100 से अधिक गांवों को एक भी सरकारी बस सेवा उपलब्ध नहीं है। इस का फायदा उठाने में न तो प्राइवेट बसें पीछे रहती हैं तथा न ही अवैध वाहन। खास बात यह है कि इन अवैध वाहनों के ड्राइवरों को इस रूट पर चलने वाली सरकारी व निजी बसों के टाइम के बारे में पल-पल का पता होता है और वे ऐसे समय अपनी उड़ान भरते हैं, जब उन्हें पता होता है कि अब इतनी देर बस नहीं आएगी? अनेक बार ऐसा भी देखा गया है कि बसों के आगे-आगे दौड़ती ये गाडिय़ां पहले सवारियां उठाने का प्रयास करते हैं।

Monday, November 1, 2010

सरहद के निकट रहने वाले किसान परेशान

श्रीगंगानगर। 1 नवम्बर(सुनीत सरदाना)यहाँ लगती महत्वपूर्ण भारत-पाक सीमा पर बसे सैकड़ों किसान इन दिनों खासी परेशानी का सामना कर रहे हैं। हालात इस कदर बिगड़े हुए हैं कि किसान मरने पर उतारू हैं, लेकिन उनकी समस्या पर न तो नौकरशाह गौर कर रहे हैं और न ही सफेदपोश नेता। दरअसल, लंबे समय से विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे किसानों के सामने हाल ही में आए एक सरकारी फरमान ने कई दुविधाएं खड़ी कर दी है। इस फरमान के मुताबिक सीमा क्षेत्र में तारबंदी के पार दो फीट से ज्यादा ऊंची फसल पर पाबंदी लगा दी गई है। जबकि किसान सीमा क्षेत्र में जो भी फसल बोते हैं, उनकी ऊंचाई दो फीट से अधिक ही है। उक्त समस्या को लेकर किसान श्री गंगानगर के पूरे प्रशासन से मिल चुके हैं और वे सरकार को भी अपनी समस्या से अवगत करवा चुके हैं। बहरहाल, किसान गुजारिश करते दिखे कि या तो उनकी जमीन को सरकार अपने कब्जे में लेकर हमें मुआवजा दे दे या सीमा पर खड़ा कर हमें गोली मार दें। वाकई में, यदि हालात यही रहे तो वो दिन दूर नहीं जब इस साधन-संपन्न जिले के सीमावर्ती किसान रोटी-रोटी को मोहताज हो जाएंगे।
यहां के ग्रामीण बताते हैं कि वे पिछले लम्बे समय से परेशान हैं, लेकिन उनकी समस्या सुनने वाला कोई नहीं है। न तो सरकार और न ही अधिकारी इस ओर ध्यान दे रहे हैं तथा नेताओं से उम्मीद करना ही बेमानी लगता है। सीमावर्ती गांव खखां के दारासिंह कहते हैं कि जब से दो फीट से ऊंची फसल न बोने का फरमान आया है,और वे इसी ऊहापोह में है कि आखिर खेत में क्या बोएगा। खुद के साथ-साथ उन्हें बच्चों के भविष्य की चिंता भी सताने लगी है। बकौल दारासिंह, 'पता नहीं वो कौन सी मनहूस घड़ी थी, जब सियासतदानों की कारगुजारियों के चलते देश का बंटवारा हुआ और आज हमें ये दिन देखने को मिले। अब तो हर रोज नई समस्या से जूझना हमारी नियती बन चुका है, लेकिन अब और बर्दाश्त नहीं होता। इसी तरह बुजुर्ग गुरप्रीत कौर कहती हैं कि यहां वर्ष 1984 के दौरान तारबंदी होनी शुरू हुई और करीब 22 वर्ष पूर्व (वर्ष 1989) तक यहां तारबंदी हो चुकी थी। इसी के साथ ही उनके बुरे दिन शुरू हो गए, क्योंकि तारबंदी के दौरान उनकी जमीनें उस पार चली गई। ऐसी ही बदहाल स्थिति गुरजंट सिंह के परिवार की है। ग्वार की फसल पकान पर है, लेकिन उसे काटने की इजाजत नहीं मिल रही है। गुरजंट सिंह स्थानीय नेताओं व अधिकारियों से मिलकर वह गुजारिश करता घूम रहा है कि सरकार उसे गोली मार दे तो ठीक है, ताकि सारी समस्या ही खत्म हो जाए। गुरजंट सिंह ने बताया कि उसकी जमीन में कपास व सरसों की फसल बहुत अच्छी होती है, लेकिन जो आदेश जारी किए गए हैं वे तो सरासर अन्याय है। अपने जवान बेटे को खो चुकी नसीब कौर ने बताया कि तारबंदी के उस पार जमीन होने के कारण हमेशा ही संकट खड़े होते रहे हैं। यही वजह है कि उनका एक बेटा मजदूरी करता-करता चल बसा। अब दो बेटियों की शादी करनी है, लेकिन नसीब कौर दो जून की रोटी को भी तरस रही हैं। बहरहाल, किसानों को केंद्र व राज्य सरकार से अब भी आस बंधी हुई है। किसानों का कहना है कि यदि पंजाब में जमीनों का मुआवजा दिया जा सकता है तो फिर राजस्थान के किसानों से सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है? यही नहीं यदि सुरक्षा के नाम पर ऐसे आदेश जारी किए जाते हैं तो फिर दूसरे इलाकों में तारबंदी के समीप हालात बदतर क्यों है और सरकार उस इलाके के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाती? आखिर हमेशा से ही किसी न किसी तरह की मार झेलते आ रहे किसान ही इस आदेशों की चपेट में क्यों आ रहे हैं? वो भी उस हालात में जब किसान अपनी जमीन सरकार को सौंपने को तैयार हैं? उधर जिला कलेक्टर सुबीर कुमार भी मानते हैं कि किसानों की यह समस्या जायज है तथा वे कहते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर बीएसएफ ने एक नॉटीफिकेशन जारी किया है, जिसके मुताबिक किसान तारबंदी के पास दो फीट से ऊंची फसल की बुआई नहीं कर सकेंगे। उनका मानना है कि निश्चित ही यह सुरक्षा का मुद्दा है, लेकिन किसानों की समस्या भी वाजिब है। जैसे भी संभव होगा, हम किसानों की इस जायज मांग को राज्य सरकार के जरिए केंद्र सरकार तक पहुंचाएंगे।